Sadhana Shahi

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देश भक्ति ग़ज़ल स्वैच्छिक प्रतियोगिता हेतु16-Mar-2024

दिनांक- 16,03.2024 दिवस- शनिवार विषय- देशभक्ति( ग़ज़ल ) स्वैच्छिक प्रतियोगिता हेतु

1- मेरे देश पर बुरी नज़र जो डालेगा, सच कहती हूंँ मैं वो नर्क को खंँगालेगा। यहांँ ऋषि- मुनियों ने तप किया भारी, कोई बेगैरत ही नहीं इसे सँवारेगा।

2--इसे खंडित की आस लेके जो भी आएगा, जाने वह कि अपने पैर पर न जाएगा । छल किया जो मेरे देश से तो सुन लो यारों, गद्दारों की भांँति वह तो सख़्त सज़ा पाएगा।

3-बच्चे फूल हैं, वो शूल से ना हो सकते, किसी कीमत पर हम उनको नहीं हैं खो सकते। ये ही देश के हमारे कर्णधार हैं जी, बाल बांँका कोई अरि नहीं कर पाएगा।

4-हमें आपस में तोड़कर जो लड़ाना चाहे, भाई -भाई का ही ख़ून बहाना चाहे, पैर पर आके वो बैसाखी लेके जाएगा, एकता का मूल मंत्र वह सदा दोहराएगा।

राष्ट्रभक्ति हमारी आन,बान,शान शान बने, हमारे बीच कोई रंजिश कभी न तने। कोई जयचंद हमें जो लड़ना चाहे, तत्क्षण ही वह ख़ाक में मिल जाएगा

साधना शाही, वाराणसी

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5 Comments

Mohammed urooj khan

18-Mar-2024 01:06 PM

👌🏾👌🏾👌🏾

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Varsha_Upadhyay

16-Mar-2024 10:48 PM

Nice

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Gunjan Kamal

16-Mar-2024 10:10 PM

बहुत खूब

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